लोक कवियत्री श्रीमती मधुरिमा पांडे,, अंजना,, जी का बहुत ही सुंदर अपनी रचना द्वारा प्रकति एवं किसान की दशा का कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया है

 

     अमलीपदर :-लोक कवियत्री ,, अंजना पाण्डेय,, के कविता किसान एवं प्रकृति के स्थिति का अपनी कविता के माध्यम से बोध कराते हुए कवियत्री श्रीमती मधुरिमा पांडे,,अंजना,, बहुत ही खूबसूरती ढंग से अपने लेखन के माध्यम से प्रकृति के वातावरण एवं किसान के चल रहे मनोदशा का बहुत ही सुंदर तरीका से अपने कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया जिसे पढ़ करके और सुन कर के सभी ने उनकी बहुत ही तारीफ की अंजना पांडे इस प्रकार से बहुत ही सुंदर सुंदर अपने लेखन के द्वारा कविता रचना करके संदेश एवं हास्य ,अनेक प्रकार की रचनाएं करती रहती हैं और इस रचना में उन्होंने किसान का मनोदशा बताया जो सभी के मन में अभी चल रहा है

 

शीर्षक है एक किसान की व्यथा इस बरस फसल अच्छी हुई तो कर दूंगा बिटिया की सगाई पिछले उधार का भी करता हूं थोड़ी सी उपाय ् सुधार दूंगा टूटते हुए छाजन पर बरसे मेघ खेत खलियान और आंगन बना लूंगा घर टुट्टी दीवार जो झांकता मुंह चुराते हुए आर पार खरीदना है ठंड के लिए कंबल और रजाई थोड़ी सी है खुशी मेरी मेरे जीवन के कर देगी भरपाई।।।।

 

रुष्टप्रकृति अब जहर घोलती कैसा यह समय चक्र आया है मानव से मानव की दूरी घातक बीमारी ने हमें डराया है एक खून के पर अब बनाई है कैसी दूरी आकर भी नहीं मिल पाते यह कैसी मजबूरी संवेदनाए है डर कर छुप गई कैसे यह बीमारी अपनों से बचने लगी है् लगे नहीकर पाते तीमारदारी।

ऐसे कविताओं को सुनकर के लोगों कविता की काफी है तारीफ एवं की सराहना की है मधूरिमा पाण्डेय इस प्रकार पहुंच से रचनाओं से लोगों को अपना संदेश एवं कविता प्रस्तुत की हैं इसी प्रकार बहुत सी रचना कर दी अंजना जी बहुत से कार्यक्रमों में भी अपना सहयोग दिया है एवं आंचलिक लोककलाकार हैं श्रीमती पांडे जी को अंजना के नाम संबोधित करते हैं। ‌‌

रिपोर्टर कृष्ण कांत त्रिपाठी

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